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चलना हमारा काम है
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Sunday, 13th April 2014
Noida

गति प्रबल पैरों में भरी
फिर क्यों रहूँ में दर दर खड़ा
जब आज मेरे सामने है रास्ता इतना पड़ा
जब तक ना मंज़िल पा सकूं
तब तक मुझे ना विराम है
चलना हमारा काम है।

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया
कुछ बोझ अपना बट गया
अच्छा हुआ तुम मिल गयीं
कुछ रास्ता ही कट गया
क्या राह में परिचय कहूँ
राही हमारा नाम है
चलना हमारा काम है।

जीवन अपूर्ण लिए हुए
पाता कभी खोता कभी
आशा निराशा से घिरा
हँसता कभी, रोता कभी
गति-मति ना हो अवरुद्ध
इसका ध्यान आठों याम है
चलना हमारा काम है।

इस विशद विश्व प्रहार में
किसको नहीं बहना पड़ा
सुख-दुःख हमारी ही तरह
किसको नहीं सहना पड़ा
फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूँ
मुझपर विधाता वाम है?
चलना हमारा काम है।

मैं पूर्णता कि खोज में
दर-दर भटकता ही रहा
प्रत्येक पग पर कुछ-ना-कुछ
रोड़ा अटकता ही रहा
निराशा क्यों मुझे?
जीवन इसी का नाम है
चलना हमारा काम है।

साथ में चलते रहे
कुछ बीच ही से फिर गए
गति ना जीवन कि रुकी
जो गिर गए सो गिर गए
रहे हर दम
उसी कि सफलता अभिराम है
चलना हमारा काम है।

फकत यह जानता
जो मिट गया वह जी गया
मूंदकर पलकें सहज
दो घूँट हँस कर पी गया
सुधा मिश्रित गर्ल
वह साकिया का जाम है
चलना हमारा काम है।

शिवमंगल सिंह सुमन
____ § ____
Synopsis

Life is an unsolvable puzzle. Perhaps it is about accepting its mystery. So, what's left to us is to simply keep going no matter what.

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