Khwaab Se Haqiqat Tak

डॉ. यश पल अरोड़ा

 


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आज है यह बात मेरे ख़्वाबों में
क्योँ नहीं हम इन कुछ किताबों में?
क्या है जो कुछ में कुछ अलग है?
कुछ तो होगा जो हम में अलग है?
क्योँ कोई ख़ास यहाँ क्योँ कोई आम है?
क्योँ ना हमारा कुछ ख़ास में नाम है?
किसी ने कैसे ऊँचा मकाम पाया है?
कुछ तो हम में भी होगा जो सामने नहींआया है?
कभी तो हम भी होंगे उन् किताबों में
यह बात सच होगी ना होगी सिर्फ ख़्वाबों में